डा० बी० आर० अम्बेडकर
बी० आर० अम्बेडकर की जीवनी -
इस प्रकार भारतरत्न बाबा साहेब डा० बी० आर० अम्बेडकर ने भारतीय साहित्य और संस्कृति की सेवा की। चिंतन की नई दिशा प्रदान करते हुए 6 दिसम्बर 1956 ई० को इस संसार से चल बसे
बी० आर० अम्बेडकर की शिक्षा –
जाति प्रथा और छुआ - छूत की रूढ़ियों से संघर्ष करते हुए उन्होंने भारत में बी० ए० तक की शिक्षा प्राप्त की। उनकी आगे की पढ़ाई अमेरिका, इंग्लैंड और जर्मनी में हुई। वे एक आदर्श विद्यार्थी थे। जब तक वे विद्यार्थी रहे एक चित्त होकर अध्ययन किये। पुस्तकालय जाने वाले विद्यार्थीयों में सबसे पहले और सब के बाद में आने वाले पहले विद्यार्थी थे। पुस्तको का सारांश लिखने के लिए उन्होंने ने एक आँशुलिपि भी खोजी थी। वे बहुत ज्यादे सोचने वाले व्यक्ति थे। किसी समस्या पर विचार करते समय उसकी तह तक जाने जा प्रयास करते थे। इसलिए लंदन में कहा गया था कि "अम्बेडकर भारत के एक महान क्रन्तिकारी नेता होंगे।" शिक्षा प्राप्त करने के बाद डा० अम्बेडकर ने बड़ौदा के महाराजा के यहाँ सेना सचिव के रूप में नौकरी की, क्योकि उन्होंने उनकी पढ़ाई में आर्थिक सहायता की थी।बी० आर० अम्बेडकर की पुस्तके और ग्रन्थ –
भारत में अनेक प्रकार की जातियां है। और यहाँ के किसी भी कार्य में जाति सबसे पहले आती है। भारत में जितना नुकसान जाति से हुआ उतना किसी से नहीं। इसलिए बी० आर० अम्बेडकर ने सबसे पहले इसी समस्या पर विचार करके 1996 ई० में उन्होंने “भारत में जातियां, उत्पत्ति और यंत्रियता” नामक ग्रन्थ की रचना की। 1935 ई० में “जातियों का मूलोच्छेद” ग्रन्थ की रचना करके भारत ही नहीं विश्व के समाज शास्त्रियों को आश्चर्य में डाल दिया। 1946 ई० में उन्होंने चौथे वर्ण पर अपना शोध प्रबंध “शुद्र कौन थे?” लिखा। इस ग्रन्थ में अछूतों के विषय में पूर्ण विचार न होने कारण उन्होंने 1947 ई० में “अछूत कौर और कैसे” ग्रन्थ भारतीय संस्कृति को प्रदान किया। “ब्रिटिश भारत में सम्राज्यवादी वित्त का विकेंद्रिकारण” 1921 और “ब्रिटिश भारत में प्रांतीय वित्त अभ्युदय” 1925 में लिखकर भारत के प्रति अंग्रेजो के आर्थिक नीति का पर्दाफाश किया। देश और समाज की उन्नति के लिए 1920 ई० में उन्होंने “मूक नायक” साप्ताहिक पत्र चलाया। आगे चलके उन्होंने अनेक ग्रंथो की रचनाएं कीजैसे-
लघु कृषि और उनके उपचार (1917)
रुपयो की समस्या, उसका उदभव और समाधान (1923)
बहिष्कृत भारत (1927)
जनता (1930)
संघ बनाम स्वतंत्रता (1939)
पाकिस्तान या भारत का विभाजन (1940)
श्री गांधी और उनका अछूतोद्धार (1942)
कांग्रेस और गांधी ने अछूतो के लिए क्या किया (1945)
राज्य एवं संख्यक (1947)
महाराष्ट्र एक भाषाई प्रान्त (1948)
भाषाई राज्यो पर विचार (1955)
समस्त राष्ट्र के प्रबोधन के लिए उन्होंने “प्रबुद्ध भारत” नामक मासिक भी चलाया। रुपयो की समस्या, उसका उदभव और समाधान (1923)
बहिष्कृत भारत (1927)
जनता (1930)
संघ बनाम स्वतंत्रता (1939)
पाकिस्तान या भारत का विभाजन (1940)
श्री गांधी और उनका अछूतोद्धार (1942)
कांग्रेस और गांधी ने अछूतो के लिए क्या किया (1945)
राज्य एवं संख्यक (1947)
महाराष्ट्र एक भाषाई प्रान्त (1948)
भाषाई राज्यो पर विचार (1955)




